Wednesday, 19 December 2012

साथ थे तुम तो,था हंसी  मंज़र
थी लबों पे हंसी,आंखों में,ख्यालों का शहर !

हुए बदनाम तेरी  महफ़िल में,तो किया
आज भी नज़रों में तेरी ,खुद को ही पाया है !

थे मालिक रियासतों के हम भी कभी
रूठ जाने से तेरे ,खुद को ,फ़कीर पाया है !