साथ थे तुम तो,था हंसी मंज़र
थी लबों पे हंसी,आंखों में,ख्यालों का शहर !
हुए बदनाम तेरी महफ़िल में,तो किया
आज भी नज़रों में तेरी ,खुद को ही पाया है !
थे मालिक रियासतों के हम भी कभी
रूठ जाने से तेरे ,खुद को ,फ़कीर पाया है !
थी लबों पे हंसी,आंखों में,ख्यालों का शहर !
हुए बदनाम तेरी महफ़िल में,तो किया
आज भी नज़रों में तेरी ,खुद को ही पाया है !
थे मालिक रियासतों के हम भी कभी
रूठ जाने से तेरे ,खुद को ,फ़कीर पाया है !
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