आजकल नशे में गुज़रती, मेरी हर इक शबनमी शाम है!
देखा है जिस दिन से उसको ,उसके नाम का ज़ाम है!
नशा चड़ा है चाहत का,न जानू किया इसका अंजाम है
लुटा सकता हूँ सब कुछ अपना,हर गली में चर्चा आम है!
गम देती हैं यादें भी अब तो ,बस इसी बात का झाम है
कटे जिंदगी नशे में तेरे,इसलिए नशेमन मेरी हर शाम है!
होश में लाकर होश उड़ाना,तेरी सूरत का काम है
न आऊं में कभी होश में ,इसलिए हाथों में जाम है!
जिंदगी लेती मोह्हबत का हर रोज़ इम्तिहान है
रहती है यादों में मेरे,बस इसी बात की शान है!
पीना सिखाया तेरी नज़रों ने,शराब पे लगा गलत इलज़ाम है
हर दम सोचता हूँ तेरे बारे में ,ये मह्कसीं शराब का ही तो काम है!
आजकल नशे में गुज़रती, मेरी हर इक शबनमी शाम है!
देखा है जिस दिन से उसको ,उसके नाम का ज़ाम है!