Friday, 20 January 2012

न कर भरोसा इन गैर -बफाओं पर,
इनकी तो फितरत है हमें, खाक में मिलाने की....

कर गुज़र अपने खुआबों को पूरा यूँ ही,
न जाने फिर कब खुदा ,हमें इस काबिल समझे..........

खुद खुदा का ही काबू नहीं अपनी ही खुदाई पर ,
वरना यूँ ही नहीं होते ,हर रोज़ कत्ले-आम दुनिया में................

Thursday, 12 January 2012

                तेरा इश्क ,मेरा वजूद है,
              इस बात का तुझे भी गुरुर है!

                                                  उकेरता हूँ चंद झरोखे यादों के कागज़ पे,
                                               लेकिन हर अल्फाज़ में मेरे ,तेरा ज़िक्र ज़रूर है!

तेरी नज़रें बयां करती हैं,समन्दर-ऐ- इश्क  की गर्त को,
जीत जाती है तू अक्सर,प्यार में लगी हर इक शर्त को!

                                            बावजूद इसके,हर दास्ताँ में इक खता ज़रूर है
                                         मंज़ूर होती है खता इश्क में,खुद खुदा का ही दस्तूर है!

तेरा इश्क ,मेरा वजूद है,
इस बात का तुझे भी गुरुर है!...............


Saturday, 7 January 2012

आजकल नशे में गुज़रती, मेरी हर इक शबनमी शाम है!
 देखा है जिस दिन से उसको ,उसके नाम का ज़ाम है!

नशा चड़ा है चाहत का,न जानू किया इसका अंजाम है
लुटा सकता हूँ सब कुछ अपना,हर गली में चर्चा आम है!

गम देती हैं  यादें भी अब तो ,बस इसी बात का झाम है
कटे जिंदगी नशे में तेरे,इसलिए नशेमन मेरी हर शाम है!

होश में लाकर होश उड़ाना,तेरी सूरत का काम है
न आऊं में कभी होश में ,इसलिए हाथों में जाम है!

जिंदगी लेती मोह्हबत का हर रोज़ इम्तिहान है
रहती है यादों में मेरे,बस इसी बात की शान है!

पीना सिखाया तेरी नज़रों ने,शराब पे लगा गलत इलज़ाम है
हर दम सोचता हूँ तेरे बारे में ,ये मह्कसीं शराब का ही तो काम है!


आजकल नशे में गुज़रती, मेरी हर इक शबनमी शाम है!
 देखा है जिस दिन से उसको ,उसके नाम का ज़ाम है!