तेरा इश्क ,मेरा वजूद है,
इस बात का तुझे भी गुरुर है!
उकेरता हूँ चंद झरोखे यादों के कागज़ पे,
लेकिन हर अल्फाज़ में मेरे ,तेरा ज़िक्र ज़रूर है!
तेरी नज़रें बयां करती हैं,समन्दर-ऐ- इश्क की गर्त को,
जीत जाती है तू अक्सर,प्यार में लगी हर इक शर्त को!
बावजूद इसके,हर दास्ताँ में इक खता ज़रूर है
मंज़ूर होती है खता इश्क में,खुद खुदा का ही दस्तूर है!
तेरा इश्क ,मेरा वजूद है,
इस बात का तुझे भी गुरुर है!...............
इस बात का तुझे भी गुरुर है!
उकेरता हूँ चंद झरोखे यादों के कागज़ पे,
लेकिन हर अल्फाज़ में मेरे ,तेरा ज़िक्र ज़रूर है!
तेरी नज़रें बयां करती हैं,समन्दर-ऐ- इश्क की गर्त को,
जीत जाती है तू अक्सर,प्यार में लगी हर इक शर्त को!
बावजूद इसके,हर दास्ताँ में इक खता ज़रूर है
मंज़ूर होती है खता इश्क में,खुद खुदा का ही दस्तूर है!
तेरा इश्क ,मेरा वजूद है,
इस बात का तुझे भी गुरुर है!...............
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