अन्जाने में खता हुई ,
जीवन भर की ये सता हुई!
फूलों से दमकता गुलशन था
हर अंग ज़हां का रोशन था
बस खुशियों की ही वादी थी
ग़मों की होती यहाँ पे शादी थी
अब तूफानों का ये आंगन है
घनघोर घटा सा साजन है
काले सायाओं का घेरा है
अरसों से नहीं हुआ ,यहाँ कोई सवेरा है
बस अंधियारों का पहरा है
काली रातों के दामन में ,
छुप गया कोई इक चेहरा है!
मेरा गुलशन अब बेज़ार हुआ
दुनिया को मेरा ये सार हुआ!
जीवन भर की ये सता हुई!
फूलों से दमकता गुलशन था
हर अंग ज़हां का रोशन था
बस खुशियों की ही वादी थी
ग़मों की होती यहाँ पे शादी थी
अब तूफानों का ये आंगन है
घनघोर घटा सा साजन है
काले सायाओं का घेरा है
अरसों से नहीं हुआ ,यहाँ कोई सवेरा है
बस अंधियारों का पहरा है
काली रातों के दामन में ,
छुप गया कोई इक चेहरा है!
मेरा गुलशन अब बेज़ार हुआ
दुनिया को मेरा ये सार हुआ!
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