रात हसीं थी,बात हसीं थी ,
उनकी हर इक अदा नशीं थी!
नैनों में शरारत,लबों पे मुस्कान,
पलकों में उनके शर्म छुपी थी!
देख क उनके हुस्न की महफ़िल,
चीज़ें इस्थिरता में चली गईं थीं,
घनघोर घटायें थीं अम्बर में,
जुल्फों में मानो सिमट गईं थीं,
आसमां की चादर भी उनके,
चुनरी से मानो लिपट गई थी,
सुनके उनकी मधुर बोली को,
कोयल भी कूंकना भूल गई थी
देख के उनकी इक झलक को,
पलकें भी झपकना भूल गईं थीं,
पाकर निसान पैरों के उनके,
महफ़िल भी फिर से चहक उठी थी
देख क उनके रूप की छाया,
दिल में इक नई कशिश उठी थी,
दमक उठी थी रात चांदनी,
रूह भी मेरी महक उठी थी!
लगने लगी थी हर चीज़ सुहानी,
धड़कन भी मेरी बहक चुकी थी
धुंदली हो गई थी सब नज़रें,
बस नज़रों में मेरे,तस्वीर बनी थी,
बन जाये वो मेरी,दिल में इक चाहत सी उठी थी,
हो जाएगी हसीं जिंदगी ,अरमानों की लहर उठी थी!
रात हसीं थी,बात हसीं थी ,
उनकी हर इक अदा नशीं थी!
नैनों में शरारत,लबों पे मुस्कान,
पलकों में उनके शर्म छुपी थी!