Saturday, 31 December 2011

रात हसीं थी,बात हसीं थी ,
उनकी हर इक अदा नशीं  थी!

नैनों में शरारत,लबों पे मुस्कान,
पलकों में उनके शर्म छुपी थी!

देख क उनके हुस्न की महफ़िल,
चीज़ें इस्थिरता में चली गईं थीं,

घनघोर घटायें थीं  अम्बर में,
जुल्फों में मानो सिमट गईं थीं,

आसमां की चादर भी उनके,
चुनरी से मानो लिपट गई थी,

सुनके उनकी मधुर बोली को,
कोयल भी कूंकना भूल गई थी

देख के उनकी इक झलक को,
पलकें भी झपकना भूल गईं थीं,

पाकर निसान पैरों के उनके,
महफ़िल भी फिर से चहक उठी थी 

देख क उनके रूप की छाया,
दिल में  इक नई कशिश उठी थी,

दमक उठी थी रात चांदनी,
रूह भी मेरी महक उठी थी!

लगने लगी थी हर चीज़ सुहानी,
धड़कन भी मेरी बहक चुकी थी

धुंदली हो गई थी सब नज़रें,
बस नज़रों में मेरे,तस्वीर बनी थी,

बन जाये वो मेरी,दिल में इक चाहत सी उठी थी,
हो जाएगी हसीं जिंदगी ,अरमानों की लहर उठी थी!

रात हसीं थी,बात हसीं थी ,
उनकी हर इक अदा नशीं  थी!

नैनों में शरारत,लबों पे मुस्कान,
पलकों में उनके शर्म छुपी थी!




जा रहा है साल पुराना,कोई रोक इसे न पायेगा,
कल होगा इक नया सवेरा ,नया साल आ जायेगा! 

यूँ तो बदलेगा बस साल का पन्ना,बाकि कुछ न बदलेगा
गुजरें हैं सावन-भादों इस वर्ष भी,हर मौसम भी गुज़रा है
भोर भये उगता है सूरज ,हर रोज़ सुबह ही निकलेगा

दिन -रात हैं सिक्के के दो पहलू,किया इक भी पहलू बदलेगा
रात भी होगी,दिन भी होगा,हर रोज़ सवेरा होयेगा

जा रहा है साल पुराना,कोई रोक इसे न पायेगा,
कल होगा इक नया सवेरा ,नया साल आ जायेगा! 


चाँद चमकता है अम्बर में,अम्बर में ही चमकेगा
बाकि सब कुछ वही रहेगा,बस साल नया आ जायेगा 

उम्मीदों की किरन खिलेगी,जोश नया जग  जायेगा
बदलेगा बस साल का पन्ना,बाकि कुछ न बदलेगा 
होगा आशाओं का नया सवेरा,साल नया आ जायेगा

चला जायेगा आज साल पुराना,बीते पल ले जायेगा
रह जाएँगी बस बीती यादें,वक़्त साथ में ले जायेगा
लोट नहीं पायेगा अब ये,दूर कहीं खो जायेगा

चला जायेगा साल पुराना,लोट क अब न आयेगा 
कल होगा इक नया सवेरा,नया साल आ जायेगा!.............

Thursday, 29 December 2011

आखिरी रात है जीवन की ,बस आज ख़ुशी से पीने दो,
कुछ वक़्त बचा है मेरे पास , हर पल को अब तुम ज़ीने दो
 कल तो मेरा कल होगा ,
कभी आज तेरा भी कल होगा,
आज को आज में जीने दो,
बस आज रात और पीने दो,


सुनकर मौत की खबर मेरी ,अपनों को बड़ा ही दुःख होगा
बस इक अपनों में तू होगी,जिसका खुशियों का पल होगा 
गुज़रा वक़्त ज़माने में,तो फितरत भी तेरी बदल गई 
रहते  थे हम भी तुझमे ,फिर क्यूँ तू खुद ही खुद में सिमट गई
डोर बंधी थी जीवन की जो ,पल भर में कियों टूट गई
मै तो तुझ से रूठ ना पाया,फिर तू मुझ से कियों रूठ गई


जान ना पाया तेरी हशरत,इस बात का मुझको गम होगा
बस आज हूँ तेरी दुनिया में,कल मेरा सवेरा कहीं और होगा  



जाने से पहले मुझको बस एक ही बात का दुःख होगा 
सुकूँ से सो जाऊंगा मै तो,माँ-बाप का मेरे किया होगा


कफ़न सजा होगा मेरा,माँ उसमे मुझे तटोएगी
आँचल मै रखकर सर मेरा, फिर फूट फूट कर रोएगी
रोएगी बहना भी मेरी,छाती को मेरी पीटेगी
राखी बान्धुगी मै अब किसको,लाश से मेरी पूछेगी 
लिपट के मेरी लाश से फिर वो,ना जाने कितना रोएगी
आयेंगे पापा जब मेरे सब को वही संभालेंगे 
देखेंगे जब चेहरा वो मेरा,फिर आंसू बहुत बहायेंगे


यूँ तो आएगी तू भी आखिर ,कुछ देर तो तू भी रोएगी 
छोड़ चला हूँ सब कुछ अब मै 
चैन से अब तू सोएगी,
जब याद आयेगा मरना मेरा ,तू खुद ही खुद को कोसेगी
याद आऊंगा जब भी तुझको,चेहरे को छुपाकर रोएगी 
देख ना पायेगी अब तू मुझको,बस सपनो में देखेगी


ये तो बातें हैं सब कल की ,इन को कल ही होने दो
रात आखिरी है जीवन की ,बस आज रात को पीने दो............................





Wednesday, 28 December 2011

दर्द ए दिल तन्हाई में आवाज़ दे रहा था कोई ,
कब्र पर मेरी ,आँशु बहा रहा था कोई,

मिलने की चाहत तो मुझे भी थी उनसे ,
पर वक़्त के दायरे में जी रहा था कोई ,

चाहता था मै भी उसे अपनी ज़ा से भी ज़यादा ,
मानता था मै उसे परवरदिगार से भी ज़यादा ,
पर मंज़ूर न था इस ज़ालिम दुनिया को ,उस को इस कदर मानना ,
मै भी नहीं चाहता था उस की याद में खुद को ही जानना ,

हो गया था बेघर तन्हाई में उनके ,
रो पड़ी थी वो भी मेरी हालत सुनके ,
इस कदर हमारी याद में दिल को ज़ख्म दे रहा था कोई,
और जान भी मेरी जाँ के लिए रोई ,

अब हर रोज़ पूछता हूँ खुदा से,किया मिल सकूँगा अपनी जाँ से,
खुदा ने भी कहा इश्क सच्चा है कोई
मिलेगा तू भी अपनी जाँ से
कियोंकि कोई जान है आखिर तेरी खातिर सोई ...............................