Saturday, 31 December 2011

जा रहा है साल पुराना,कोई रोक इसे न पायेगा,
कल होगा इक नया सवेरा ,नया साल आ जायेगा! 

यूँ तो बदलेगा बस साल का पन्ना,बाकि कुछ न बदलेगा
गुजरें हैं सावन-भादों इस वर्ष भी,हर मौसम भी गुज़रा है
भोर भये उगता है सूरज ,हर रोज़ सुबह ही निकलेगा

दिन -रात हैं सिक्के के दो पहलू,किया इक भी पहलू बदलेगा
रात भी होगी,दिन भी होगा,हर रोज़ सवेरा होयेगा

जा रहा है साल पुराना,कोई रोक इसे न पायेगा,
कल होगा इक नया सवेरा ,नया साल आ जायेगा! 


चाँद चमकता है अम्बर में,अम्बर में ही चमकेगा
बाकि सब कुछ वही रहेगा,बस साल नया आ जायेगा 

उम्मीदों की किरन खिलेगी,जोश नया जग  जायेगा
बदलेगा बस साल का पन्ना,बाकि कुछ न बदलेगा 
होगा आशाओं का नया सवेरा,साल नया आ जायेगा

चला जायेगा आज साल पुराना,बीते पल ले जायेगा
रह जाएँगी बस बीती यादें,वक़्त साथ में ले जायेगा
लोट नहीं पायेगा अब ये,दूर कहीं खो जायेगा

चला जायेगा साल पुराना,लोट क अब न आयेगा 
कल होगा इक नया सवेरा,नया साल आ जायेगा!.............

No comments:

Post a Comment