दर्द ए दिल तन्हाई में आवाज़ दे रहा था कोई ,
कब्र पर मेरी ,आँशु बहा रहा था कोई,
मिलने की चाहत तो मुझे भी थी उनसे ,
पर वक़्त के दायरे में जी रहा था कोई ,
चाहता था मै भी उसे अपनी ज़ा से भी ज़यादा ,
मानता था मै उसे परवरदिगार से भी ज़यादा ,
पर मंज़ूर न था इस ज़ालिम दुनिया को ,उस को इस कदर मानना ,
मै भी नहीं चाहता था उस की याद में खुद को ही जानना ,
हो गया था बेघर तन्हाई में उनके ,
रो पड़ी थी वो भी मेरी हालत सुनके ,
इस कदर हमारी याद में दिल को ज़ख्म दे रहा था कोई,
और जान भी मेरी जाँ के लिए रोई ,
अब हर रोज़ पूछता हूँ खुदा से,किया मिल सकूँगा अपनी जाँ से,
खुदा ने भी कहा इश्क सच्चा है कोई
मिलेगा तू भी अपनी जाँ से
कियोंकि कोई जान है आखिर तेरी खातिर सोई ...............................
कब्र पर मेरी ,आँशु बहा रहा था कोई,
मिलने की चाहत तो मुझे भी थी उनसे ,
पर वक़्त के दायरे में जी रहा था कोई ,
चाहता था मै भी उसे अपनी ज़ा से भी ज़यादा ,
मानता था मै उसे परवरदिगार से भी ज़यादा ,
पर मंज़ूर न था इस ज़ालिम दुनिया को ,उस को इस कदर मानना ,
मै भी नहीं चाहता था उस की याद में खुद को ही जानना ,
हो गया था बेघर तन्हाई में उनके ,
रो पड़ी थी वो भी मेरी हालत सुनके ,
इस कदर हमारी याद में दिल को ज़ख्म दे रहा था कोई,
और जान भी मेरी जाँ के लिए रोई ,
अब हर रोज़ पूछता हूँ खुदा से,किया मिल सकूँगा अपनी जाँ से,
खुदा ने भी कहा इश्क सच्चा है कोई
मिलेगा तू भी अपनी जाँ से
कियोंकि कोई जान है आखिर तेरी खातिर सोई ...............................
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